Thursday, May 24, 2018
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जग संतान जनक तू सबका हे भगवान – पाण्डेय ‘व्यग्र’ Pandey Vyagra

व्यग्र पाण्डेय

रचनाकार परिचय :-

विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’  ”जन्म तिथि :-01/01/1965

विधा – कविता, गजल , दोहे, लघुकथा, व्यंग्य-लेख आदि
सम्प्रति – शिक्षक (शिक्षा-विभाग)
प्रकाशन – (1)कश्मीर-व्यथा(खण्ड-काव्य)(2) कौन कहता है …(काव्य-संग्रह) एवं मधुमती, दृष्टिकोण, अनन्तिम, राष्ट्रधर्म, शाश्वत सृजन, जयविजय, गति, पाथेय कण, प्रदेश प्रवाह, सुसंभाव्य, शिविरा पत्रिका, प्रयास, शब्दप्रवाह, दैनिक नवज्योति आदि पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित |
प्रसारण – आकाशवाणी-केन्द्र स. मा. से कविता, कहानियों का प्रसारण ।
सम्मान – विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मान प्राप्त|

अरे विधाता…
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  जग संतान
जनक तू सबका
  हे भगवान
   ————
  तेरा इरादा
समझ नहीं आता
अरे विधाता
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  निर्णय तेरे
यदा कदा लुभाते
  खूब रुलाते
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  तुम हो माँझी
सब ये हि बताते
  पार लगाते
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  हे मेरे मौला
सुख दुख से कैसा
  जीवन तोला
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  माया निराली
भरा भरा लगे है
  फिरभी खाली
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  भेजे थे सभी
करने सद्कर्मों को
  ना कि धर्मों को
  —————-
  हो सुखी सब
बरसे कृपा तेरी
  ये मंशा मेरी
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