Thursday, May 24, 2018
Home > Poet And Writer > राखी – भाई बहिन का निश्छल प्यार

राखी – भाई बहिन का निश्छल प्यार

भाई बहिन का निश्छल प्यार है राखी

भाई बहिन का निश्छल प्यार है राखी
भागीरथी  की निर्मल सी धार है राखी

सावन में राह निहारे आयेगा मेरा भैया
ससुराल में पीयर का ख़ुमार है राखी

सँजोकर रखी हमने अमूल्य समझकर
संस्कृति का अनुपम त्योहार है राखी

केवल कलई की शोभा इसे ना समझना
देश-धर्म की रक्षा का विचार है राखी

बहिन बेटियों को तकते हैं  बुरी ऩज़र से
उन ज़ालिमों को तलवार की धार है राखी

भाव चुन-चुनकर ग़ज़ल बनाई जिसने

‘व्यग्र’ कवि का शब्द – संसार है राखी

विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

Bhai Bahan Ka Pyar Hai Rakhi

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *